सुशील अवस्थी "राजन"; बाबा रामदेव के राजनीतिक अनुलोम विलोम को सांसद बनने के इच्छुक लोग करना चाह रहे हैं/ऐसे बहुत से लोग हैं जो राजनीति में जाना तो चाह रहे है पर उनके पास धनबल व बाहुबल का अभाव है/ऐसे लोग बाबा जी का बताया हर अनुलोम विलोम करने को तैयार हैं/उम्मीद की जा रही है कि बाबा जी संभावित २०१४ के लोकसभा चुनावों में धमाल कर गुजरेंगे/पर क्या इतना आसान है धमाल/कांग्रेस के कुख्यात महासचिव दिग्विजय सिंह तो अभी से आक्रामक हो गए हैं/ बाबा को गुस्सा आ गया है/पर राजनीति में आना चाह रहे हो तो इसके लिए तो तैयार ही होना होगा/दूसरे के काले धन कि चर्चा करोगे तो आपके धन की चेकिंग तो होगी ही /हाँ इस अवसर पर यदि आपके धन में जरा भी कालिख दिखी तो भावी सांसदों के अरमानों के चेहरे काले होने में टाइम नहीं लगेगा /
Monday, February 28, 2011
Wednesday, February 23, 2011
Maya Jee Teri Maya.........
सुशील अवस्थी "राजन" ........मैया जी तेरी माया समझ न आवे" एक देवी गीत है,जिसमे माता जगत जननी की शक्तियों का गुणगान है/ मै बात करना चाहता हूँ बहन कुमारी मायावती की माया की,मतलब "माया जी तेरी माया समझ न आवे" वह कब क्या करना चाहती हैं,शायद विरोधी कायदे से भांप नहीं पाते हैं/ वह खुद तो जिलों के दौरों पर हैं,पर विरोधी अभी भी विधान सभा में ही फंसे हैं/ वह जनता से मुखातिब हैं/मतलब.....साफ है /बिहार विधान सभा चुनाओं का असर माया की कार्यशैली पर दिख रहा है/जिस प्रकार बिहार के लोगों ने जातिवाद की राजनीति को तिलांजलि दी है,वह ही माया की बेसब्री का सबसे बड़ा कारण है/क्योंकि ....जातिवाद की राजनीति का गढ़ रहे बिहार के राजनीतिक तौर तरीकों का उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा अनुयायी रहा है/
जिले -जिले जा कर विकास की स्थिति से अवगत होना बहुत अच्छी बात है,पर वह कहीं लेट तो नहीं हो गयी हैं,इस पर ध्यान देना होगा/ कांग्रेस -उत्थान के गुब्बारे की गैस निकल जाने से भी माया को राहत महसूस करनी चाहिए/सभी बड़ी पार्टियों के अन्दर -बाहर चल रही उठापटक भी बहिन जी को खुश कर सकती है,पर छोटी पार्टियों का एकीकरण चिंता का सबब बन सकता है/ राष्ट्रीय लोकदल - इंडियन जस्टिस पार्टी - पीस पार्टी -भारतीय समाज पार्टी -मिल्लते कौंसिल- उदय मंच जैसी कुछ एक पार्टियों ने आज जो गठबंधन घोषित किया है वह चिंता का सबब हो सकता है/ राष्ट्रीय लोकदल के पश्चिमी उत्तर प्रदेश तो पीस पार्टी के पूर्वी उत्तर प्रदेश के समीकरण का असर आने वाले दिनों में यूपी की सियासत पर साफ-साफ दिखने वाला है/ बस अजित सिंह के इमानदारी से काम करने की जरुरत होगी,क्योंकि राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है की अजित सिंह इस गठबंधन से कांग्रेस को डराना चाहते हैं/ताकि केंद्र सरकार में उचित संयोजन मिल सके/ सरकार विरोधी मतों की मान्य धारणा से भी माया को बचना होगा/ कहना आसान है ....पर माया के फिर से चुनकर यूपी की सत्ता पर काबिज़ होने में बड़ी बाधाएँ हैं/ वह कितनी बाधाओं को पार कर पाती हैं,यह तो आने वाला २०१२ ही बताएगा/
Saturday, February 19, 2011
Kranti Ke Senaniyon Ko ..Ath Shree Loktantra Katha ....
क्रांति बहुत बढ़िया फिल्म है जो आपने हमने सबने देखी है/लेकिन इधर क्रांति की चर्चा बहुत जोरों पर है.... अरे भाई फिल्म की नहीं ...हम चर्चा कर रहे हैं परिवर्तन, बदलाव वाली क्रांति की/लोग सड़कों पर उतर कर क्रांति-क्रांति चिल्ला रहे हैं/उन देशों में क्रांतीवाद की लहर तेज़ थपेड़े मार रही है,जहाँ लोकतंत्र नहीं है/अत्याचार काबिले बर्दास्त हो सकता है बस शोषित को उफ़ करने से न रोकिये/लोकतंत्र क्या है ...?क्या लोकतान्त्रिक देशों में कोइ समस्या नहीं ..... क्या जम्हूरियत में शासक अपनी जनता पर कोई अत्याचार नहीं करते? जनतंत्र का मतलब..... अत्याचारी द्वारा दी गयी चोटों पर किसी भी सुर में मातम कर सकने का जन्मसिद्ध अधिकार हैं/जिसे हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कहते हैं,जबकि गैर लोकतान्त्रिक देशों में यह सुअवसर आपको नहीं दिया जा सकता है/ हम दुनिया के सबसे बडे लोकतंत्र हैं... पर हमारी समस्याएँ क्या छोटी हैं क्या? हमें हमारे सेवक लूट रहे हैं ... पाई- पाई को मोहताज़ हम भारतीयों का करोड़ों - अरबों रुपया लुट रहा है पर लोकतंत्र यह लूट रोंक पा रहा है क्या?लोकतंत्र में घाघ नेता पब्लिक को कुत्ता और अपने को हांथी समझकर कहते होंगे कि हांथी चलता रहता है और कुत्ते भोंकते रहते हैं,इनके मुह नहीं लगा जाता/हम गला फाड़-फाड़ कर चिल्लाते रहते हैं और भ्रष्टाचार व घोटाले धारावाहिक तर्ज़ पर जारी रहते हैं/किसी भ्रष्ट नेता को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र अपने किये गए कुकर्मों की ऐसी सजा दे पाया है क्या जिससे डर कर लुटेरे हम गरीबों के हक़ पर डांका डालने से पहले एक बार भी लोकतंत्र की मौजूदगी के बारे में सोंच सकें? गरीबों-दलितों के उद्धार के नाम पर सत्ता में आये लोग तो तानाशाहों जैसे ही लगते हैं /हम क्या कर सकते हैं सिवाय यह सोंचने के ... इनकी वैलिडिटी कब ख़त्म हो रही है ? समझदार नागरिक तो यह भी जान चुकें हैं की इनके बाद जो आनेवाले हैं वह भी कुछ कम नहीं होंगे/ किसी अच्छे के आने के इंतजार में हम जिस व्यवस्था में जीतें और मरते हैं, उसे ही लोकतंत्र कहते हैं/इतने पर भी यदि क्रांतिकारियों को लोकतान्त्रिक व्यवस्था रास आ रही है तो यह हमारे लिए गर्व की बात है/गर्व इस लिए की लाख बुराइयों के बावजूद भी लोकतंत्र से बेहतर शासन प्रणाली इस धरती पर दूसरी कोई नहीं है .... लोकतंत्र की ही महिमा है की सुशील अवस्थी जैसा अनजाना व्यक्ति उपदेश कर रहा है,और इस उपदेश की कहीं कोई सजा नहीं है/ मतलब छोटे मुंह बड़ी बात सिर्फ लोकतंत्र में ही की जा सकती है /छोटे लोगों को बड़ा ओहदा भी लोकतंत्र ही दिला सकता है.... शायद यही कारण है क्रांतिकारियों के उग्र होने का .... जय हो लोकतंत्र भगवान् की ........जैसे हमारे दिन बहुरे हैं वैसे ही तुम्हारे भी बहुरे इसी शुभकामना के साथ आपका अपना - सुशील अवस्थी "राजन"
Ham Nisandeh Deshbhakt Hain......
सुशील अवस्थी "राजन", हम भारत वासी देशभक्त होते ही हैं,जब- जब देश पर कोई विपत्ति आयी हम सब एक होकर उससे भिड़े हैं,और उसे परास्त भी किया है /लेकिन ना जाने क्यों अब ऐसा लग रहा है कि भ्रष्टाचार हमको परास्त कर रहा है /यू.पी.ए.-2 की सरकार भ्रष्टाचारियों के सामने असहाय सी हो गयी है / उस पर बहाने बाजी ऐसी कि मानो गठबंधन की सरकार चलाकर मनमोहन जी देश पर बड़ा एहसान कर रहे हों /गठबंधन की सरकार चलाने का मतलब, भ्रष्टों के सामने हथियार डालना ...... यह कौन सा राजनैतिक धर्म है ? लोकतंत्र ही भारत की ताकत है ....और अब हमको आपको भी अपने वोट की ताकत से भ्रष्टाचारियों से लड़ना ही होगा/ राष्ट्र संचालकों के लड़खड़ाते कदम कह रहे हैं कि ऐ भारतवासियों इस विपत्ति से भी देश को बचाने के लिए आगे आओ....... और अपने वोट कि ताकत से स्वाभिमानी भारत का निर्माण करो /
Wednesday, February 9, 2011
jam lagta hai bahin jee.......
बहिन जी आप आजकल पूरे प्रदेश के तूफानी दौरे पर हैं, करीब -करीब रोज़ आप एअरपोर्ट जाती और आती हैं /आपके आने जाने से कितना पहले राजधानी पुलिस यातायात रोंक देती है?आम राजधानी वासी को कितनी समस्या होती है ?लोग क्या बातें करते हैं?आपको जानना चाहिए /
Subscribe to:
Comments (Atom)