Saturday, February 19, 2011

Kranti Ke Senaniyon Ko ..Ath Shree Loktantra Katha ....

क्रांति बहुत बढ़िया फिल्म है जो आपने हमने सबने देखी है/लेकिन इधर क्रांति की चर्चा बहुत जोरों पर है.... अरे भाई फिल्म की नहीं  ...हम चर्चा कर रहे हैं परिवर्तन, बदलाव वाली क्रांति की/लोग सड़कों पर उतर कर क्रांति-क्रांति चिल्ला रहे हैं/उन देशों में क्रांतीवाद की लहर तेज़ थपेड़े मार रही है,जहाँ लोकतंत्र नहीं है/अत्याचार काबिले बर्दास्त हो सकता है बस शोषित को उफ़ करने से न रोकिये/लोकतंत्र क्या है ...?क्या लोकतान्त्रिक देशों में कोइ समस्या नहीं ..... क्या जम्हूरियत में शासक अपनी जनता पर कोई अत्याचार नहीं करते? जनतंत्र का मतलब..... अत्याचारी द्वारा दी गयी चोटों पर किसी भी सुर में मातम कर सकने का जन्मसिद्ध अधिकार  हैं/जिसे हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कहते हैं,जबकि गैर लोकतान्त्रिक देशों में यह सुअवसर आपको नहीं दिया जा सकता है/ हम दुनिया के सबसे बडे लोकतंत्र हैं... पर हमारी समस्याएँ क्या छोटी हैं क्या? हमें हमारे सेवक लूट रहे हैं ... पाई- पाई को मोहताज़ हम भारतीयों का करोड़ों - अरबों रुपया लुट रहा है पर लोकतंत्र यह लूट रोंक पा रहा है क्या?लोकतंत्र में घाघ नेता पब्लिक को कुत्ता और अपने को हांथी समझकर कहते होंगे कि हांथी चलता रहता है और कुत्ते भोंकते रहते हैं,इनके मुह नहीं लगा जाता/हम गला फाड़-फाड़ कर चिल्लाते रहते हैं और भ्रष्टाचार व घोटाले धारावाहिक तर्ज़ पर जारी रहते हैं/किसी भ्रष्ट नेता को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र अपने किये गए कुकर्मों की  ऐसी  सजा दे पाया है क्या जिससे डर कर लुटेरे हम गरीबों के हक़ पर डांका डालने से पहले एक बार भी लोकतंत्र की मौजूदगी के बारे में सोंच सकें? गरीबों-दलितों के उद्धार के नाम पर सत्ता में आये लोग तो तानाशाहों जैसे ही  लगते हैं /हम क्या कर सकते हैं सिवाय यह सोंचने  के ...   इनकी वैलिडिटी कब ख़त्म हो रही है  ? समझदार नागरिक तो यह भी जान चुकें हैं की  इनके बाद जो आनेवाले हैं वह भी कुछ कम नहीं होंगे/ किसी अच्छे के आने के इंतजार में हम जिस व्यवस्था में जीतें और मरते हैं, उसे ही लोकतंत्र कहते हैं/इतने पर भी यदि क्रांतिकारियों को लोकतान्त्रिक व्यवस्था रास आ रही है तो यह हमारे लिए गर्व की बात है/गर्व इस लिए की लाख बुराइयों के बावजूद भी लोकतंत्र से बेहतर शासन प्रणाली इस धरती पर दूसरी कोई नहीं है ....  लोकतंत्र की ही महिमा है की सुशील अवस्थी जैसा अनजाना व्यक्ति उपदेश कर रहा है,और इस उपदेश की कहीं कोई सजा नहीं है/ मतलब छोटे मुंह बड़ी बात सिर्फ लोकतंत्र में ही की जा सकती है /छोटे लोगों को बड़ा ओहदा भी लोकतंत्र ही दिला सकता है.... शायद यही कारण है क्रांतिकारियों के उग्र होने का .... जय हो लोकतंत्र भगवान् की ........जैसे हमारे दिन बहुरे हैं वैसे ही तुम्हारे भी बहुरे इसी शुभकामना के साथ आपका अपना - सुशील अवस्थी "राजन"

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