सुशील अवस्थी "राजन" ........मैया जी तेरी माया समझ न आवे" एक देवी गीत है,जिसमे माता जगत जननी की शक्तियों का गुणगान है/ मै बात करना चाहता हूँ बहन कुमारी मायावती की माया की,मतलब "माया जी तेरी माया समझ न आवे" वह कब क्या करना चाहती हैं,शायद विरोधी कायदे से भांप नहीं पाते हैं/ वह खुद तो जिलों के दौरों पर हैं,पर विरोधी अभी भी विधान सभा में ही फंसे हैं/ वह जनता से मुखातिब हैं/मतलब.....साफ है /बिहार विधान सभा चुनाओं का असर माया की कार्यशैली पर दिख रहा है/जिस प्रकार बिहार के लोगों ने जातिवाद की राजनीति को तिलांजलि दी है,वह ही माया की बेसब्री का सबसे बड़ा कारण है/क्योंकि ....जातिवाद की राजनीति का गढ़ रहे बिहार के राजनीतिक तौर तरीकों का उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा अनुयायी रहा है/
जिले -जिले जा कर विकास की स्थिति से अवगत होना बहुत अच्छी बात है,पर वह कहीं लेट तो नहीं हो गयी हैं,इस पर ध्यान देना होगा/ कांग्रेस -उत्थान के गुब्बारे की गैस निकल जाने से भी माया को राहत महसूस करनी चाहिए/सभी बड़ी पार्टियों के अन्दर -बाहर चल रही उठापटक भी बहिन जी को खुश कर सकती है,पर छोटी पार्टियों का एकीकरण चिंता का सबब बन सकता है/ राष्ट्रीय लोकदल - इंडियन जस्टिस पार्टी - पीस पार्टी -भारतीय समाज पार्टी -मिल्लते कौंसिल- उदय मंच जैसी कुछ एक पार्टियों ने आज जो गठबंधन घोषित किया है वह चिंता का सबब हो सकता है/ राष्ट्रीय लोकदल के पश्चिमी उत्तर प्रदेश तो पीस पार्टी के पूर्वी उत्तर प्रदेश के समीकरण का असर आने वाले दिनों में यूपी की सियासत पर साफ-साफ दिखने वाला है/ बस अजित सिंह के इमानदारी से काम करने की जरुरत होगी,क्योंकि राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है की अजित सिंह इस गठबंधन से कांग्रेस को डराना चाहते हैं/ताकि केंद्र सरकार में उचित संयोजन मिल सके/ सरकार विरोधी मतों की मान्य धारणा से भी माया को बचना होगा/ कहना आसान है ....पर माया के फिर से चुनकर यूपी की सत्ता पर काबिज़ होने में बड़ी बाधाएँ हैं/ वह कितनी बाधाओं को पार कर पाती हैं,यह तो आने वाला २०१२ ही बताएगा/
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