Monday, January 24, 2011

kya jiyoge desh k khatir ?

        २६ जनवरी आ रही है,जन गण मन गाया जायेगा...... टी.वी. पर ध्वजारोहण.... सैनिकों का जादुई कदमताल..... कुछ अत्याधुनिक हथियारों  का प्रदर्शन और बस हो गयी २६ जनवरी / क्या ....क्या मतलब इस एक छुट्टी का ?आम आदमी कहता है कि नेताजी करेंगे जो भी करना होगा क्योंकि वो हमारे प्रतिनिधि हैं ,हमने उन्हें वोट दिया है/नेता जी का मानना है कि शक्ति तो जनता में निहित है वो जो भी कराना चाहेगी जनमत बनाकर करवा लेगी /गणतंत्र दिवस का मतलब लोगों में देशभक्ति की भावना का संचार करना है /देशभक्ति का स्वरुप समय काल के अनुसार अलग - अलग होता है /जैसे आजादी से पहले देश के लिए जान न्योछावर करना देशभक्ति होता था, पर आज के नजरिये से देखा जाय तो देश के लिए मरने से ज्यादा देश के लिए जीना देशभक्ति है /क्या आप और हम कभी देश के लिए जिए क्या ....?घर परिवार बीबी बच्चो के लिए तो हम हमेशा जिए, पर देश के लिए .......?यदि इस गणतंत्र दिवस पर हम देश के लिए जीना सीख गए तो फिर यकीन मानिये राष्ट्र मंडल खेल कभी भ्रष्ट मंडल खेल नहीं बन सकेंगे,घोटालों का आदर्श स्थापित करने वाले कभी हमारे भाग्यविधाता नहीं बन सकेंगे /
         शुभ  संकेत यह है कि आस और उम्मीद कायम है ,जब हम बिहार , और गुजरात की तरफ देखते हैं / नरेन्द्र मोदी और नितीश कुमार देश के नायक बनने की ओर अग्रसर हैं, प्रदेश स्तर पर सकारात्मक कार्य करके, जबकि कुछ राष्ट्रीय स्तर के नेता प्रदेश स्तर के लायक भी नहीं बचे हैं नकारात्मक कार्य करके /हम और आपने सही काम करनेवालों को सराहा और पुरुष्कृत किया / हमारे पास वोट से बड़ी ताकत कोई नहीं है, हम अगर देश के बारे में सोचेंगे तो पाएंगे कि आम आदमी सिर्फ सही मतदान करके ,सही व्यक्ति का चयन करके बड़ी देश सेवा कर सकता है /हम जहाँ हैं वहां इमानदारी से कार्यसेवा करके भी हम वास्तविक देश सेवा कर सकते हैं/ क्या इस बार हम ऐसा ही कुछ करने जा रहे हैं ....बोलो न ....../ जय हिंद .....जय हिंद .....भारत माता की जय .../       आपका -              सुशील अवस्थी "राजन" 

Friday, January 21, 2011

UP ka Nitesh Kumar Kaun ......?

(सुशील अवस्थी "राजन") करीब 17 महीने बाद यू पी के लोगों को अपनी राज्य सरकार का चयन करना होगा /क्या BSP बिहार के इतिहास को यहाँ दुहरा पायेगी ? या फिर कोई और पार्टी अपना साम्राज्य स्थापित करेगी...... यह देखने वाली बात होगी / आइये देखते हैं यू पी की जमीनी हकीकत / पहले बसपा की चर्चा की जाय...... तो कहा जा सकता है कि सबसे ताकतवर पार्टी के रूप में वही दिख रही है /एक सर्वमान्य नेता बहिन मायावती ,और कठोर अनुशासन पार्टी की सबसे बड़ी ताकत  है / क्या एक बार फिर कोई ऐसा चमत्कार हो पायेगा जिससे यह पार्टी फिर से यू पी की सत्ता पर काबिज़ हो सके सोचना आसान है....../ बसपा कभी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई इसलिए दलित के मन में हमेशा माया का पूरा कार्यकाल देखने के कसक बाकी रही / अब कसक से ठसक तक सफ़र तय कर चुका दलित अरबों रुपया दलित महापुरुषों के नाम पर खर्च होते हुए देख चुका है /बेहतर जीवन स्तर या मूर्ति पत्थर ? दलित किसका चयन करता है देखने वाली बात होगी / क्रमशः जारी रहेगा ..... 

Monday, January 17, 2011

mahangaee....mahangaee ...

(सुशील अवस्थी "राजन") महंगाई को लेकर शोरगुल जारी है/ पर यह चुनावी मुद्दा बन सकेगी क्या ? यदि यह चुनावी मुद्दा नहीं बन सकती तो कांग्रेस पर क्या फर्क पड़ेगा भाजपा रूपी कमजोर बकरी के मिमियाने का ?हम उत्तर प्रदेश के लोग क्या २०१२ तक याद रख पाएंगे कि २०१० के जाते -जाते और २०११ के आते समय इस महंगाई ने हम आम लोगों के चेहरों पर कितनीं खरोंचें दी थी ? हमारे जीवन की वास्तविक समस्याएँ,कहाँ चुनावी मुद्दा बन पाती हैं ? अगर भूल चूक से मुद्दा बन भी गयीं तो उस मुद्दे को कहाँ कोई जनादेश मिल पाता है ? जनादेश पर भाषण करना तो हमने सीख लिया पर मतदान करने का वक्त आने पर हम तथाकथित शिक्षित लोग आराम को वरीयता देते हैं /अगर हम चाहते हैं कि महंगाई पर निर्णायक प्रहार हो तो हमें अपने वोट रूपी अस्त्र का संधान करना होगा /

Wednesday, January 12, 2011

khud ko samjho....

अपनी ताकत पहचानने की कोशिश होती रहनी चाहिए /आत्म बल ही सबसे बड़ा बल है /छोटे -छोटे संकल्प करिए और उनको पूरा भी कीजिये/मै आपको बताऊँ ,मैंने संकल्प किया कि मै पान मसाला नहीं खाऊंगा /कोशिश की और सफल हुआ /छोंड दिया तो छोंड दिया ,एक अच्छा काम कर दिखाया /आप भी कर सकते हैं /आपका -सुशील अवस्थी "राजन"

Sunday, January 9, 2011

Vilupt ho sakta hay dost-

(सुशील अवस्थी "राजन") जो अच्छा लगे,जिसपर विश्वास करने को जी चाहे,जिसका नाम याद आते ही आप खुश हो जाये,ऐसे इंसान को क्या कहा जा सकता है ?दोस्त ,महबूब, माशूक ......?क्या आपके पास कोई ऐसा है जिसपर आप आँख मूदकर भरोसा कर सकें ?यदि हाँ.....  तो अपने आपको सौभाग्यशाली मानिये /यकीन मानिये ऐसे लोग हमारे आपके बीच से विलुप्त होने की कगार पर हैं/एक दिन दो जवान लड़के बात कर रहे थे ,कि राघव (काल्पनिक नाम ) से हमने इस लिए दोस्ती की ताकि उसकी खुबसूरत बहन पटा सकूँ / ये भी दोस्त हैं /दोस्ती को अपने आस -पास करीब-करीब हम इसी रूप में पाते हैं /ऐसे माहौल में यदि आपके पास एक अदद विश्वास पात्र दोस्त हो तो आप क्यों ना अपने आप पर इतराएँ /
महबूबाओं की बात सुनो ,एक लड़की अपनी सहेली के ब्वाय -फ्रेंड को लेकर भाग गयी ,इसलिए क्योंकि वह उसके वाले से ज्यादा अमीर था /क्या आज की ज्यादातर महबूबाओं के इरादे ऐसे ही नहीं होते ?ऐसे में यदि आपके पास एक फख्र करने वाली महबूबा हो तो आप अपने आप को क्या कहलाना पसंद करोगे भाग्यशाली या दुर्भाग्यशाली ?वास्तव में अच्छे लोग आपको तभी मिलते हैं जब ऊपर वाले की इच्छा हो /
हम अपने आस -पास विलुप्त होने की कगार पर खड़े ऐसे लोगों को खोजें,उनका सम्मान करें,तभी इस प्रजाति को बचाया जा सकता है /शेष फिर कहूँगा /

Friday, January 7, 2011

Up police ki jay-

(सुशील अवस्थी "राजन") उत्तर प्रदेश की आन ,बान,शान हमारी अपनी पुलिस का कोई जवाब नहीं /न जाने कितने महापुरुष इसको सुधारने के चक्कर में खुद सुधर गए /पर ये है कि अपनी आन बान शान पर कोई आंच नहीं आने दे रही है / आजकल मैं सुबह -सुबह दूध लेने अपने १० वर्षीय सुपुत्र के साथ जाता हूँ ,तो अपनी महान पुलिस के कारनामों को देखने का सुअवसर मिलता है /वाहनों से अवैध वसूली का पुनीत कार्य जारी रहता है /बड़ी बेशर्मी से सड़क पर लूट का खेल जारी रहता है/ हमारे जांबाज़ सिपाहियों पर कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन बगल से गुजर रहा है /यह है निर्भीकता और निडरता का अदम्य परिचय /इतनी निडरता का कारण .........../सब जानते हैं /आप बोलिए क्या आपने अपनी निडर पुलिस का यह रूप नहीं देखा है ?मेरा बेटा मुझसे रोज़ पूंछता है कि पुलिस किस चीज़ का पैसा ट्रक वालों से लेती है ?मै कहता हूँ कि घूस है ,तो वह कहता है कि हाँ ...क्या मै जानता नहीं घूस तो चोरी से ली जाती है / अब अपनी पुलिस के ये कारनामें अनैतिक वा गैरकानूनी नहीं रहे /सरे राह निर्बाध रूप से किया जा रहा कार्य अनैतिक हो सकता है क्या ?हम सब इस कार्य को नैतिक रूप देने में बराबर के जिम्मेदार हैं /कभी बोला नहीं मुह खोला नहीं /सर्र से गुजर गए /अब तो ये सब आम बात हो गयी है /
      मुझे याद आ रही है एक पूर्व मुख्यमंत्री की पहल ,जिसमे उन्होंने ट्रकों से हो रही अवैध वसूली को रोकने के लिए बड़े प्रयास किये पर धन्य हैं अपने वीर सपूत, जो कि टस से मस न हुए /

Wednesday, January 5, 2011

Koe To Punche Kaise Ho.....?

(सुशील अवस्थी "राजन")खूब ठण्ड पड़ रही है ? लोग परेशान हैं /महंगाई भी बढ़ रही है ,लोग उससे भी परेशान हैं /पूर्व वित्त मंत्री और अब के गृहमंत्री  पी .चिदंबरम कह रहे हैं कि बढ़ती महंगाई किसी टैक्स से कम नहीं है /प्रधानमंत्री भी बहुत चिंतित हैं /सोनिया जी भी अपनी चिंता कई बार सार्वजानिक कर चुकी हैं /पर कुछ भी सकारात्मक होता हुआ नहीं दिख रहा है /महंगाई को सब अपनी अपनी नजर से देख रहे हैं /विशेषज्ञ इतनी महीन समीक्षा कर रहे हैं कि आम आदमी की समझ में कुछ नहीं आ रहा है /राजनीतिज्ञों की समीक्षा से सिर्फ इतना समझ आता है, कि वह कह रहे हैं कि इस सरकार से कमान छीन कर हमें मौका दे दो बस /
    आम आदमी को मनमोहन जी से कोई शिकायत नहीं है /उसे शिकायत है तो सिर्फ सोनिया ,राहुल से /क्योंकि हमने कांग्रेस को वोट मनमोहन से मोहित होकर नहीं दिया ,बल्कि सोनिया राहुल जी के मुख से यह सुनकर दिया कि कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ /लेकिन ऐसा कुछ दिखना भी चाहिए कि कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ है /यह हाँथ अब आम आदमी के गिरेबान पर आ गया लगता है /यकीन मानिये महंगाई वास्तव में डायन का रूप अख्तियार कर चकी है / विरोधी दल के रूप में भाजपा की अद्वितीय लाचारी ,कांग्रेस को निश्चिन्त किये हुए है /सत्ता धारी पार्टी के नेता विरोधी नेताओ का भी रोल अदा कर रहे हैं ,और बेशर्मी से कह रहे हैं कि महंगाई किसी टैक्स से कम नहीं है /
   हम नहीं जानना चाहते कि महंगाई डायन इतनी पावर फुल कैसे हो गयी / पंवार की पावरफुल वार्ताएं महंगाई को पावरफुल करने में कितनी जिम्मेदार हैं हम नहीं जानना चाहते ?हम इतना जानना चाहते हैं कि क्या सरकार के पास कोई ठोस रणनीति नहीं जिसके दम पर वह हम महंगाई के आतंक से पीड़ित लोगों को कोई ठोस आश्वाशन दे सके /सरकार बताये कि आम आदमी का असमय वध कर रही इस महंगाई डायन का वह वध करेगी या फिर ........?काश भाजपा पावरफुल होती ?

Saturday, January 1, 2011

Naya Varsh Mangalmay Ho-

सुशील अवस्थी "राजन" -आज से हम एक साल तक दिनांक लिखने में २०११ अंक का इस्तेमाल करेंगे/ कुछ दिनों तक अजीब लगेगा फिर यह हमारी आदत में शामिल हो जायेगा /२०१० हमें क्या दे गया इसका विवरण लिखने में बहुत समय लगेगा,पर संछेप में कहा जाय तो इतना कहा जा सकता है कि,हम पर सारी दुनिया का भरोसा बढ़ा है पर हमारा कम हुआ है /ब्रिटेन,अमरीका,जर्मनी,रूस,चीन,जापान,फ़्रांस आदि देशों का भरोसा भारत की मजबूत होती अर्थव्यवस्था,वा बढ़ती वैश्विक भूमिका के कारण इतना बढ़ा कि साल २९१० में ही दुनिया के इन ताकतवर देशों ने किसी न किसी रूप में भारत कि ताकत का लोहा मान लिया/लेकिन 2g स्पेक्ट्रम,आदर्श हाऊसिंग सोसाएटी,कामनवेल्थ खेल घोटालों ने हमारे अपने लोगों का विश्वास अपनी ही व्यवस्था वा सरकार पर कम किया है /
लेकिन वहीं बिहार के लोगों के विश्वास की ताकत कि,अव्यवस्था से पूरी ताकत से लड़ो व्यवस्था स्थापित हो जायेगी,पूरे भारत के लोगों को आशान्वित करती है कि सब बदल सकता है बस अँधेरे के सामने सर मत झुकाव /जातीयता,माफियागीरी,दबंगई,की राष्ट्रीय प्रयोगशाला बिहार सुशाशन,वा सुव्यवस्था की राह पर तेजी से बढ़ चला है /उसके इस बदलाव को उसका सर्वाधिक नजदीकी पड़ोसी उत्तर प्रदेश बड़ी विस्मयकारी निगाह से देख रहा है /यह नया वर्ष २०११ यू पी की सोंच को तराशने वा परिपक्वता प्रदान कराने की द्रष्टि से बेहद अहम् है /हम बिहार के परिवर्तन का सम्मान करते हैं या फिर थोडा और वक्त लेते हैं /