(सुशील अवस्थी "राजन")खूब ठण्ड पड़ रही है ? लोग परेशान हैं /महंगाई भी बढ़ रही है ,लोग उससे भी परेशान हैं /पूर्व वित्त मंत्री और अब के गृहमंत्री पी .चिदंबरम कह रहे हैं कि बढ़ती महंगाई किसी टैक्स से कम नहीं है /प्रधानमंत्री भी बहुत चिंतित हैं /सोनिया जी भी अपनी चिंता कई बार सार्वजानिक कर चुकी हैं /पर कुछ भी सकारात्मक होता हुआ नहीं दिख रहा है /महंगाई को सब अपनी अपनी नजर से देख रहे हैं /विशेषज्ञ इतनी महीन समीक्षा कर रहे हैं कि आम आदमी की समझ में कुछ नहीं आ रहा है /राजनीतिज्ञों की समीक्षा से सिर्फ इतना समझ आता है, कि वह कह रहे हैं कि इस सरकार से कमान छीन कर हमें मौका दे दो बस /
आम आदमी को मनमोहन जी से कोई शिकायत नहीं है /उसे शिकायत है तो सिर्फ सोनिया ,राहुल से /क्योंकि हमने कांग्रेस को वोट मनमोहन से मोहित होकर नहीं दिया ,बल्कि सोनिया राहुल जी के मुख से यह सुनकर दिया कि कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ /लेकिन ऐसा कुछ दिखना भी चाहिए कि कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ है /यह हाँथ अब आम आदमी के गिरेबान पर आ गया लगता है /यकीन मानिये महंगाई वास्तव में डायन का रूप अख्तियार कर चकी है / विरोधी दल के रूप में भाजपा की अद्वितीय लाचारी ,कांग्रेस को निश्चिन्त किये हुए है /सत्ता धारी पार्टी के नेता विरोधी नेताओ का भी रोल अदा कर रहे हैं ,और बेशर्मी से कह रहे हैं कि महंगाई किसी टैक्स से कम नहीं है /
हम नहीं जानना चाहते कि महंगाई डायन इतनी पावर फुल कैसे हो गयी / पंवार की पावरफुल वार्ताएं महंगाई को पावरफुल करने में कितनी जिम्मेदार हैं हम नहीं जानना चाहते ?हम इतना जानना चाहते हैं कि क्या सरकार के पास कोई ठोस रणनीति नहीं जिसके दम पर वह हम महंगाई के आतंक से पीड़ित लोगों को कोई ठोस आश्वाशन दे सके /सरकार बताये कि आम आदमी का असमय वध कर रही इस महंगाई डायन का वह वध करेगी या फिर ........?काश भाजपा पावरफुल होती ?
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