Monday, January 17, 2011

mahangaee....mahangaee ...

(सुशील अवस्थी "राजन") महंगाई को लेकर शोरगुल जारी है/ पर यह चुनावी मुद्दा बन सकेगी क्या ? यदि यह चुनावी मुद्दा नहीं बन सकती तो कांग्रेस पर क्या फर्क पड़ेगा भाजपा रूपी कमजोर बकरी के मिमियाने का ?हम उत्तर प्रदेश के लोग क्या २०१२ तक याद रख पाएंगे कि २०१० के जाते -जाते और २०११ के आते समय इस महंगाई ने हम आम लोगों के चेहरों पर कितनीं खरोंचें दी थी ? हमारे जीवन की वास्तविक समस्याएँ,कहाँ चुनावी मुद्दा बन पाती हैं ? अगर भूल चूक से मुद्दा बन भी गयीं तो उस मुद्दे को कहाँ कोई जनादेश मिल पाता है ? जनादेश पर भाषण करना तो हमने सीख लिया पर मतदान करने का वक्त आने पर हम तथाकथित शिक्षित लोग आराम को वरीयता देते हैं /अगर हम चाहते हैं कि महंगाई पर निर्णायक प्रहार हो तो हमें अपने वोट रूपी अस्त्र का संधान करना होगा /

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