सुशील अवस्थी "राजन" -आज से हम एक साल तक दिनांक लिखने में २०११ अंक का इस्तेमाल करेंगे/ कुछ दिनों तक अजीब लगेगा फिर यह हमारी आदत में शामिल हो जायेगा /२०१० हमें क्या दे गया इसका विवरण लिखने में बहुत समय लगेगा,पर संछेप में कहा जाय तो इतना कहा जा सकता है कि,हम पर सारी दुनिया का भरोसा बढ़ा है पर हमारा कम हुआ है /ब्रिटेन,अमरीका,जर्मनी,रूस,चीन,जापान,फ़्रांस आदि देशों का भरोसा भारत की मजबूत होती अर्थव्यवस्था,वा बढ़ती वैश्विक भूमिका के कारण इतना बढ़ा कि साल २९१० में ही दुनिया के इन ताकतवर देशों ने किसी न किसी रूप में भारत कि ताकत का लोहा मान लिया/लेकिन 2g स्पेक्ट्रम,आदर्श हाऊसिंग सोसाएटी,कामनवेल्थ खेल घोटालों ने हमारे अपने लोगों का विश्वास अपनी ही व्यवस्था वा सरकार पर कम किया है /
लेकिन वहीं बिहार के लोगों के विश्वास की ताकत कि,अव्यवस्था से पूरी ताकत से लड़ो व्यवस्था स्थापित हो जायेगी,पूरे भारत के लोगों को आशान्वित करती है कि सब बदल सकता है बस अँधेरे के सामने सर मत झुकाव /जातीयता,माफियागीरी,दबंगई,की राष्ट्रीय प्रयोगशाला बिहार सुशाशन,वा सुव्यवस्था की राह पर तेजी से बढ़ चला है /उसके इस बदलाव को उसका सर्वाधिक नजदीकी पड़ोसी उत्तर प्रदेश बड़ी विस्मयकारी निगाह से देख रहा है /यह नया वर्ष २०११ यू पी की सोंच को तराशने वा परिपक्वता प्रदान कराने की द्रष्टि से बेहद अहम् है /हम बिहार के परिवर्तन का सम्मान करते हैं या फिर थोडा और वक्त लेते हैं /
bhut sahee likha aapne.dheraj
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