(सुशील अवस्थी "राजन") उत्तर प्रदेश की आन ,बान,शान हमारी अपनी पुलिस का कोई जवाब नहीं /न जाने कितने महापुरुष इसको सुधारने के चक्कर में खुद सुधर गए /पर ये है कि अपनी आन बान शान पर कोई आंच नहीं आने दे रही है / आजकल मैं सुबह -सुबह दूध लेने अपने १० वर्षीय सुपुत्र के साथ जाता हूँ ,तो अपनी महान पुलिस के कारनामों को देखने का सुअवसर मिलता है /वाहनों से अवैध वसूली का पुनीत कार्य जारी रहता है /बड़ी बेशर्मी से सड़क पर लूट का खेल जारी रहता है/ हमारे जांबाज़ सिपाहियों पर कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन बगल से गुजर रहा है /यह है निर्भीकता और निडरता का अदम्य परिचय /इतनी निडरता का कारण .........../सब जानते हैं /आप बोलिए क्या आपने अपनी निडर पुलिस का यह रूप नहीं देखा है ?मेरा बेटा मुझसे रोज़ पूंछता है कि पुलिस किस चीज़ का पैसा ट्रक वालों से लेती है ?मै कहता हूँ कि घूस है ,तो वह कहता है कि हाँ ...क्या मै जानता नहीं घूस तो चोरी से ली जाती है / अब अपनी पुलिस के ये कारनामें अनैतिक वा गैरकानूनी नहीं रहे /सरे राह निर्बाध रूप से किया जा रहा कार्य अनैतिक हो सकता है क्या ?हम सब इस कार्य को नैतिक रूप देने में बराबर के जिम्मेदार हैं /कभी बोला नहीं मुह खोला नहीं /सर्र से गुजर गए /अब तो ये सब आम बात हो गयी है /
मुझे याद आ रही है एक पूर्व मुख्यमंत्री की पहल ,जिसमे उन्होंने ट्रकों से हो रही अवैध वसूली को रोकने के लिए बड़े प्रयास किये पर धन्य हैं अपने वीर सपूत, जो कि टस से मस न हुए /
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