Tuesday, March 8, 2011

Kala Dhan...........

धन जीविकोपार्जन के लिए जरुरी है /पर कितना ..........? कुछ संतोषी संतों ने कहा कि सांई इतना दीजिये जा में कुटुम समाय .......पर आजकल तो धन की चाह रखने वालों का दिल मांगे मोर .....वाले फार्मूले को स्वीकारता जा रहा है /देश का अरबों रुपया विदेशी बैंकों में जमा है /हसन नाम का एक व्यक्ति तो खरबों रुपया का अकेला मालिक है /हम भी तो धनिकों को अतिरिक्त सम्मान देतें हैं /बगैर यह जाने कि जिस धन का वह मालिक है, वह कैसे कमाया गया है?धनिकों का सम्मान तो होना चाहिए पर उचित तरीके से अमीर बने लोगों का /ऐसा कर के हम शायद काले धन की कुछ मुखालफत कर सकेंगे / ........सुशील अवस्थी "राजन"

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