लखनऊ की सड़कों पर ऐसे कार चालक भी गाड़ी चला रहे हैं, जो छोटी से छोटी बात पर आप पर गाड़ी चढ़ा सकते हैं |घटना कल की है,मवैया चौराहे पर यातायात सिपाही राकेश सविता अपनी ड्यूटी पर था | चारबाग की तरफ से तेज़ गति से आ रही कार ने एक साईकिल सवार को ठोकर मार दी जिससे साईकिल सवार दूर जा गिरा |ड्यूटी पर तैनात सिपाही सविता ने कार के आगे खड़े होकर कार रोकनी चाही, पहले तो कार चालक ने गति धीमी की तो लगा की शायद वह गाड़ी रोकना चाहता है, पर सहसा गाड़ी की स्पीड अप्रत्याशित रूप से बढ़ी और देखते ही देखते राकेश को कुचलती हुई आँखों से ओझल हो गयी | अभी तक वह गाड़ी और ड्राईवर राजधानी पुलिस की पकड़ से दूर है | दिन दहाड़े ११ बजे घटी यह घटना कई सवाल जन्म दे गयी |
पहला सवाल यह , की राकेश के बीबी बच्चों का क्या होगा ? दूसरा की राजधानी पुलिस के पास ऐसे साधनों संसाधनों का आभाव है,जिससे ऐसी घटनाओ को अंजाम देनेवालों को चिन्हित किया जा सके | अरबों रुपया पत्थरों की मूर्तियों व पार्कों पर खर्च करनेवाली सरकार को सजीव मूर्तियों की भी चिंता करनी चाहिए |कानून व्यवस्था की दुहाई देने वाली सरकार को अपनी पुलिस को संसाधन भी उपलब्ध कराने चाहिए | नहीं तो कब तक राकेश अपनी जान की कुर्बानी देकर नौकरी करेंगे ?
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