सुशील अवस्थी "राजन";-
'अमेरिका के साथ हुए परमाणु समझौते के बाद चीन यह समझ चुका है कि भारत को कहीं उसके खिलाफ इस्तेमाल न कर लिया जाय /उसके बाद से उसे हमारी जरुरत ज्यादा है /चीन को चीन पश्चिमी देशों के सहयोग ने बनाया है /यदि यही सहयोग भारत को मिल गया तो भारत चीन को आसानी से पछाड़ सकता है /भारत का बेदाग परमाणु रिकार्ड और परिपक्व लोकतंत्र सारी दुनिया को अपनी तरफ आकर्षित करता है /हमारी सशक्त अर्थ व्यवस्था सभी को हमसे जुड़ने के लिए बाध्य कर रही है /फिर भले ही वह हमसे लगाव रखता हो या नहीं /वास्तव में चीन दुनिया के किसी भी देश से इतना सशंकित नहीं रहता जितना कि भारत से /भारत के लोकतंत्र का चीन भी अव्यक्त समर्थक है /भगवान् बुद्ध की कर्मस्थली भारत से आम चीनी आध्यात्मिक भाव से जुडा है /आर्थिक प्रतिस्पर्धा चीन को भविष्य में सिर्फ भारत से ही मिलनी है यह बात सारी दुनिया जानती है /चीन के अपने हर पडोसी से सीमा विवाद हैं /लामबंदी का खेल भारत अगर खेलना शुरू कर दे तो चीन परेशान हो उठेगा /जबकि भारत पाकिस्तान को झेल और बर्दास्त कर सकता है /भगवान् बुद्ध के अनुयायी दलाई लामा भारत में ही हैं ,चीन इसबात को कायदे से समझ रहा है /हम आज की तारीख में चीन से किसी भी हाल में कमजोर स्थिति में नहीं हैं /बस हमें अपनी ताकत और कमजोरियों को कायदे से समझ कर अपने शक्तिशाली पड़ोसी से व्यवहार तय करने की जरुरत है / शेष अगले अंक में -
china ke rajnitik vichardhara vistar ki rahi hai.aur sach me bharat dyara iska samana khushalta se karna acha hoga.
ReplyDelete