Thursday, December 30, 2010

Khambhe Khali Nahe....

सुशील अवस्थी "राजन"- नए साल की बधाईयाँ आपको भी मिल रहीं होंगी ,हमें तो खूब मिल रही हैं /नजर जिधर -जिधर जाय उधर बधाई ही नजर आय /खम्भा दर खम्भा ,चौराहा दर चौराहा ,जिधर देखिये नए साल की बधाई देने वालों का ताँता लगा हुआ है /ये सब भावी नगर निगम के चुनाओं की ही महिमा है जो कि बधाई प्रदाता सेलुलर कंपनियों की तरह बढे जा रहे हैं /सुन्दर -सुन्दर चेहरे वाले प्रत्याशियों की तो पौ बारह है /पर मेरे जैसे ऊबड़ -खाबड़ प्रत्याशियों को डर सता रहा है कि कहीं पब्लिक चेहरा देख कर ही न बाहर का रास्ता दिखा दे /
मै सोचता हूँ कि क्या मतलब ऐसी राजनीति का जिसमे काम से ज्यादा चेहरा मायने रखता हो ?होर्डिंग ,या पोस्टर के जरिये अपने आपको अपने वोटरों के सामने प्रस्तुत करने का यह तरीका हमारे निकम्मेपन को ही दर्शाता है / विधान सभा या सांसदी के चुनाव में तो पोस्टर होर्डिंग का मतलब समझ आता है ,क्योंकि इन चुनाओं में छेत्र बड़ा होता है ,पर सभासदी में यदि आपको लोग पोस्टर या होर्डिंग से जाने तो मान लीजिये कि आप ही चुनाव हार रहे हैं /
आज की बात बताऊँ ,सभासदी के एक संभावित उमीदवार जिनका मानना था कि पार्षदी के चुनाओं में होर्डिंग पोस्टर का कोई मतलब नहीं होता ,आज दिन -दहाड़े अपनी होर्डिंग लगवाते हमें दिख गए ,मैंने कहा अरे भाई ये सब क्या है ?कहने लगे भाई पब्लिक कह रही है कि सब दिख रहे हैं सिवाय आपके /बताओ मरता क्या न करता ?जहाँ तक मै जान सका हूँ राजनीति का मतलब जनसेवा होता है /जिसके मन वचन कर्म से हमें यह आभास हो कि जाये, कि यह व्यक्ति सबका भला चाहता है, वही हमारे जनप्रतिनिधि के पद का सच्चा अधिकारी है /पर होर्डिंग में लटक जाने से कौन सी जनसेवा होती है मेरी तो समझ से बाहर है/आपकी समझ में क्या है? बता सको तो बताओ /

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