Friday, December 24, 2010

janleva kuretiyan-

सुशील अवस्थी "राजन"जानलेवा कुरीतियाँ हमारे समाज में आज भी  विद्यमान हैं,इनसे बचने की जरुरत है /१३ दिसंबर को हमारी चाची जी का स्वर्गवास हो जाने के बाद मै अपनी पत्नी के साथ अपने गाँव कसरावां गया /मैं यहीं का रहनेवाला हूँ ,पिछले कई सालों से लखनऊ में रह रहा हूँ /कसरावां रायबरेली जनपद में पड़ता है /रायबरेली का यू पी में इस लिए भी विशेष स्थान है क्योंकि सोनियां गाँधी यहाँ से सांसद हैं /ठण्ड के इस मौसम में मेरी पत्नी सोनी अवस्थी को गाँव के बाहर एक सुनसान स्थान पर नाऊन वा गाँव घर की कुछ औरतों के साथ प्रतिदिन दो बार सुबह और शाम स्नान के लिए जाना पड़ता था /मैंने कई दिनों तक मना किया कि एक बार में भी काम हो सकता है फिर दो बार जाने कि (वह भी सिर्फ एक कपडे में) क्या जरुरत है / लोकलाज और यह सोचकर कि लोग क्या कहेंगे ?मेरी पत्नी जातीं रहीं और अंततः बीमार भी पड़ गयीं हैं / मैं यह सोंच रहा हूँ कि क्या यह सब करने का कोई मतलब है ?यदि नहीं ,तो फिर हम और आप ऐसी बेवजह की जानलेवा कुरीतियों का बहिष्कार क्यों नहीं कर पाते हैं ?मै आज रात ८ बजे लखनऊ आया हूँ ,किसी अच्छे डाक्टर को दिखा कर पत्नी का इलाज कराने का विचार लेकर सोने जा रहा हूँ /पर आप बताइए कि हम लोग कब तक बेवजह के काम करते रहेंगे ?

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