Thursday, April 14, 2011

"BADAL GAYA HAI LUCKNOW"

         
                                                     बदल गया है लखनऊ  
लखनऊ,14 अप्रैल, अगर आप कई सालों पहले कभी लखनऊ आयें हों, तो यकीन मानिये नवाबों के इस शहर लखनऊ को अब आप कतई नहीं पहचान सकेंगे| क्योंकि इधर ३-४ सालों में शहर की रंगत बदल चुकी है| एअरपोर्ट से शहर की तरफ बढ़ते ही आलमबाग के अवध हॉस्पिटल चौराहे से ही बदले लखनऊ की बानगी मिलनी शुरू हो जाती है| vip रोड के किनारे -किनारे विकसित किये गए बुद्ध विहार उपवन की सुन्दरता निहारने से पहले आपका स्वागत एक अतिविशाल द्वार से होगा,जिसका निर्माण अभी प्रगति पर है| दाहिनी तरफ बुद्ध विहार की चहार-दिवाली समाप्त होने से पहले बांयी तरफ एक भव्य इमारत का गुम्बद आपका ध्यान बरबस ही अपनी ओर  आकर्षित कर लेगा| यह गुम्बद बसपा संस्थापक कांशीराम का स्मारक है| गुम्बद के ही पीछे एक विशाल ईको पार्क का निर्माण करीब-करीब संपन्न हो रहा है| इसी सड़क पर चलते हुए आप प्रसिद्द अम्बेडकर पार्क का भी नज़ारा ले सकते हैं| जो की गोमती नगर में स्थित है| कांशीराम स्मारक चौराहे से बांये न जाकर यदि आप दाहिनी तरफ रुख करें,तो बंगला बाज़ार पार करते ही दाहिनी तरफ एक विशाल मैदान और मैदान के कुछ हिस्सों में दलित महापुरुषों की मूर्तियों का दीदार आप जिस स्थान पर कर रहे हैं,वह स्मृति उपवन के नाम से जाना जाता है,यहीं पर लखनऊ महोत्सव व दशहरे के मेले का आयोजन होता आ रहा है| आगे बढ़ने पर बहुत ही बड़ा  मैदान रमा बाई अम्बेडकर मैदान है,जहाँ राजनैतिक पार्टियों की रैलियां आयोजित होती हैं| जिसके बारे में कहा जाता है की इसको भरने की कूबत सिर्फ मायावती में ही है| छोटे छोटे और भी कई पार्क व मूर्तियाँ हैं जो आपका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करेंगे ही| इन सारे बदलावों का श्रेय उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती को ही जाता है| क्योंकि जबसे उन्होंने मुख्यमंत्री का पद संभाला है,तभी से राजधानी को निखारने का कार्य शुरू हुआ है|
           हालाँकि विरोधी उनके इस काम पर शुरुआत से ही आपत्तियां जताते आ रहे हैं| भाजपा प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक कहते हैं "सिर्फ भवनों पार्कों मूर्तियों के निर्माण से शहर सुन्दर नहीं हो जाते हैं| अच्छा होता मायावती जी दलित महापुरुषों के आदर्शों का अनुकरण करती न की सिर्फ मूर्तियाँ खडी करती| प्रदेश कार्यसमिति सदस्य भाजपा प्रमोद बाजपई  कहते हैं  सिर्फ एअरपोर्ट से लेकर कालिदास मार्ग तक के रास्ते को चमका देने से न पूरा शहर विकसित होता है, और ना ही प्रदेश| सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी कहते हैं मायावती को यही नहीं मालूम है की खेतों की पैदावार बढ़ाना जरुरी है या मूर्तियों पार्को का निर्माण| विधान परिषद् सदस्य अरविन्द त्रिपाठी "गुड्डू" का मानना है की बहन जी ने शहर को एक ऐतिहासिक रूप दिया है,जिसे आने वाली पीढियां युगों-युगों तक याद करेंगी|
             कोइ कुछ भी कहे लखनऊ को एक नई पहचान मिल रही है,आप जब भी राजधानी आइये,नए लखनऊ का दीदार जरुर करिए|       (सुशील अवस्थी "राजन")

1 comment:

  1. ye to bilkul sahi hai. pradesh ki rajdhani hone ke nate lucknow ko iski zaroorat thi. halki sampurna pradesh ka viskas behad aham hai aur wahi pehli prathmikta bhi honi chahiye par phir bhi ye badlav accha lagta hai.

    ReplyDelete