हमारे प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह चीन में हैं|श्री सिंह ब्रिक्स के शिखर सम्मलेन में भाग लेने चीन गए हुए हैं|"brics" का शाब्दिक मतलब, B से ब्राजील, R से रूस, I से इंडिया, C से चीन, और S का तात्पर्य शीघ्र ही इस संगठन से जुड़े साऊथ अफ्रीका से है| उपरोक्त देशों की सदस्यता वाले इस संगठन ब्रिक्स को भविष्य का G -7 भी कहा जाता है| G -7 विकसित देशों का संगठन है|चीन और भारत की तेज़ी से बढ़ रही अर्थव्यवस्थाओं के कारण ही ये संगठन भविष्य का G -7 है| ब्रिक्स का दुनिया में प्रभाव बढ़ने का मतलब,पश्चिमी देशों की एकाधिकारवादी व्यापारिक नीतियों के समापन की घोषणा| ब्राजील,रूस,साऊथ अफ्रीका, से भारत को कतई कोई शिकायत नहीं है,परन्तु चीन से भारत का विभेद जगजाहिर है|
सवाल यह है भारत क्या करे ? पश्चिम का एकाधिकार तोड़ने के लिए चीन को मजबूत करे,या फिर पश्चिम-चीन की लड़ाई में "राष्ट्रहित" को वरीयता दे| मुझे लगता है ब्रिक्स के माध्यम से भारत को चीन और पश्चिमी देशों दोनों को नियंत्रित करने की रणनीति अपनानी चाहिए| जो होता हुआ भी दिख रहा है| हालाँकि अभी तो ब्रिक्स की ताकत बढ़ाने के लिए ही सभी सदस्य देशों को काम करना चाहिए| क्योंकि अभी इन देशों का सकल घरेलू उत्पाद दुनिया के देशों का मात्र 17 प्रतिशत ही है,जिसके 2030 तक 47 फीसदी तक पहुंचने की सम्भावना है| दुनिया में हमारी भूमिका महत्वपूर्ण हो रही है| भारत "शक्तिशाली" बने इसमे हमारी भूमिका कम महत्वपूर्ण नहीं है, क्योंकि हम एक लोकतान्त्रिक मुल्क हैं,जिसका हम सभी को नाज़ है|

Vidshi maamlo ke bhi acche jaankaar hai aap.
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