Tuesday, April 19, 2011

"BHARAT BHAVYA BANANA HAI"

         बड़ी ख़ुशी होती है भारत को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित होते हुए देख कर|विश्व बिरादरी में भारत का कद दिन बा दिन बढ़ता ही जा रहा है|इस बढ़ते कद के पीछे है हमारी तेज़ी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था|वह अर्थव्यवस्था जिसे कदम कदम पर "सबल भ्रष्टों" से दो चार होना पड़ रहा है|
        मै कभी कभी सोंचता हूँ कि क्या भारत पहली बार सम्पन्नता का सामना करने जा रहा है|हम पहले भी तो संपन्न थे,जब सारी दुनिया हमें सोने की चिड़िया कहकर संबोधित करती थी, लेकिन हम बहुत दिनों तक गुलामी की जंजीरों में जकड़े रहे|क्यों........?क्या फिर से सम्पन्नता हांसिल करने से पूर्व हमें चिंतन की आवश्यकता नहीं कि कैसे इस सम्म्पनता को चिर-स्थाई बनाये रखा जाय|पुरानी गलतियों से सबक लेने की जरुरत है|
         अभी हमें याद है कि कैसे हमारी सामाजिक टूटन का लाभ उठाकर दुनिया के लुटेरों ने हमें लूटा था|हमें आपस में लड़ाकर हमारा धन लूटने वालों का दोष नहीं,दोष तो हमारा था कि हम उनकी आसान सी रणनीति नहीं समझ सके|जब आपके पास धन होता है तो डकैतों का आना तो तय है|डकैत का तो काम ही है रूप बदल कर छल कपट के द्वारा बलात धनिक का धन लूटना|कुछ इतिहासकार अभी भी डकैतों को ही सारा दोष दे रहें हैं|
          सच्चाई तो यही है कि हम तब भी ब्राम्हण -ठाकुर,हिन्दू- मुस्लिम,ऊंच-नींच, में बंटे थे  और आज भी बंटे हैं|कल हमें अंग्रेज लूटते थे,आज भारतीय अंग्रेज़|विदेशी अंग्रेजों से कई गुना ज्यादा नुकसानदायक और खतरनाक हैं ये भारतीय अँगरेज़|इनसे लड़ने के लिए हमें फिर से आजादी की लडाई छेड़ने की जरुरत है|गाँधी की जगह अन्ना चाहिए|हथियार की जगह वोट को बतौर हथियार इस्तेमाल करना होगा| न  खून न खराबा,न देश के लिए मरना|सिर्फ देश के लिए जीना सीखने की जरुरत है|जब आप देश के लिए जीना सीख जायेंगे,तब ही देश महफूज़ रह सकेगा|

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