Saturday, March 26, 2011

"BHARAT-PAK BHIDANT"

क्रिकेट का है ये  विश्व युद्ध,
मोहाली है मैदान,
जीत के खातिर भारत-पाक
जरुर लड़ायेंगे जान |
              जरुर लड़ाए जान, 
              नाम भी देश का होगा |
              क्रिकेट को समझे युद्ध, 
              महा मूरख वह पोंगा |
एक की होगी विजय,
हार एक संग होगी ,
जो  नहीं करे  स्वीकार
बने वो मानस रोगी |
              व्यक्ति हो या देश ,
              उसी की दुर्गति होती |
              तज के ठीक हालात ,
              बने जो मानस रोगी |
क्रिकेट को समझो खेल
कभी न पीड़ा होगी|
बढाओ हौसला देश का 
बनकर राष्ट्र के जोगी | 
               कह सुशील कविराय,
               करौ न कौनिउ चिंता|
               जितिहई अपनिन टीम,
               अपन संग हवई सचिन"दा" |

Friday, March 25, 2011

"RAKESH KI GALTI KYA THI"

      लखनऊ की सड़कों पर ऐसे कार चालक भी गाड़ी चला रहे हैं, जो छोटी से छोटी बात पर  आप पर गाड़ी चढ़ा सकते हैं |घटना कल की है,मवैया चौराहे पर यातायात सिपाही राकेश सविता अपनी ड्यूटी पर था | चारबाग की तरफ से तेज़ गति से आ रही कार ने एक साईकिल सवार को ठोकर मार दी जिससे साईकिल सवार दूर जा गिरा |ड्यूटी पर तैनात सिपाही सविता ने कार के आगे खड़े होकर कार रोकनी चाही, पहले तो कार चालक ने गति धीमी की तो लगा की शायद वह गाड़ी रोकना चाहता है, पर सहसा गाड़ी की स्पीड अप्रत्याशित रूप से बढ़ी और देखते ही देखते राकेश को कुचलती हुई आँखों से ओझल हो गयी | अभी तक वह गाड़ी और ड्राईवर राजधानी पुलिस की पकड़ से दूर है | दिन दहाड़े ११ बजे घटी यह घटना कई सवाल जन्म दे गयी |
       पहला सवाल यह , की  राकेश के बीबी बच्चों का क्या होगा ? दूसरा की राजधानी पुलिस के पास ऐसे साधनों संसाधनों का आभाव है,जिससे ऐसी घटनाओ को अंजाम देनेवालों को चिन्हित किया जा सके | अरबों रुपया पत्थरों की मूर्तियों व पार्कों पर खर्च करनेवाली सरकार को सजीव मूर्तियों की भी चिंता करनी चाहिए |कानून व्यवस्था की दुहाई देने वाली सरकार को अपनी पुलिस को संसाधन भी उपलब्ध कराने चाहिए | नहीं तो कब तक राकेश अपनी जान की कुर्बानी देकर नौकरी करेंगे ?

Thursday, March 24, 2011

"WORLD CUP-2011;PRARTHANA.... DILAYEGI BHARAT KO VIJAY"

आइये ईश्वर से प्रार्थना करें कि भारत ऑस्ट्रेलिया को परास्त कर सके | क्योंकि मुकाबला शुरू हो चुका है |अपनी टीम पर हम  उतना ही भरोसा कर सकते हैं, जितना कि हम अपने नेताओ पर करते हैं |अभी तक के प्रदर्शन के आधार पर तो नहीं कहा जा सकता है कि ये भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया को परास्त कर सकेगी,पर करोड़ों भारतीय जीत का इंतजार कर रहे हैं ....यह सब जानते हुए  |ठीक उसी अंदाज़ में कि दिल है कि मानता नहीं |करोड़ों लोगों की प्रार्थना और दुआ यदि रंग लाई तब ही भारत विजयी होगा |तो क्या कर रहे हो चलो दुआ करो .......

Tuesday, March 22, 2011

"JARA YAAD KARO KURBANI"

२३ मार्च भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के इतिहास की महत्वपूर्ण तारीख है| भगत सिंह,सुखदेव, और राजगुरु का बलिदान दिवस है २३ मार्च....|ये शहीद आम अवाम के दिलो -दिमाग में आज भी जिन्दा हैं| भारत माता के इन वीर सपूतों को सम्पूर्ण भारत वासियों की तरफ से सुशील अवस्थी का सदर प्रणाम |धन्य है उनका बलिदान ...| इन शहीदों के कार्यों को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी की हम भी अपने देश को याद रखें बस.... इसके अलावा कुछ भी करना,कहना,लिखना ....निरर्थक है बकवास है|

Monday, March 21, 2011

Bachao..Bachao UP Ko Bachao.....

 (सुशील अवस्थी "राजन")     हाँ मैंने यू.पी. याने उत्तर प्रदेश को बचाने की गुहार लगाई है ..... कि बचाओ ...बचाओ ....| हमारा प्रदेश हमारी कमजोरियों के कारण लुट रहा है| विकास नापने तोलने के जितने पैमाने होते हैं, हम हर पैमाने पर फिसड्डी ही hain | आंकड़े हम नहीं चस्पा कर पाएंगे ,क्योंकि आंकड़ो से विचारों की लयबद्धता कुंद हो जाती है,पर सत्य है कि मंदिर- मस्जिद, हिन्दू -मुस्लिम, जाति -पांति, की संकीर्णता ने हमारा बेड़ा गर्क किया है | इक्कीसवीं शताब्दी में.. जब  सारी दुनिया में भारत का डंका बज रहा है, ओबामा जैसा ....ताकतवर मुल्क अमेरिका का राष्ट्रपति अपने देश के लोगों को रोजगार देने के लिए भारत की यात्रा करता है,उसी मुल्क के एक प्रमुख प्रान्त उत्तर प्रदेश में शाम होते ही गाँव,क़स्बे और शहर सब अंधकार की चपेट में होते हैं|बिजली के खम्भे होते हैं... उनपर झूलते तार भी होते हैं ...पर बिजली नहीं | तमसो मा ज्योतिर्गमय ...मतलब अंधकार से प्रकास  की ओर ले चलने की हमारी झूठी कामना आज तक पूरी न हो सकी | 
       मै अपनी और किसी लाचारी या बेचारगी का जिक्र नहीं करना चाहूँगा, कि स्कूल,अस्पताल,कल कारखानें,सड़कें,नहरें,पेयजल आपूर्ति,कानून व्यवस्था सब अपनी बदहाली  पर आंसू बहा रहे हैं| प्रकाश  व्यवस्था का जिक्र करना इसलिए भी मै जरुरी समझता हूँ, क्योंकि अंधकार यानी अज्ञानता से लड़ने में प्रकाश ज्ञान का प्रतीक है|
       इन अव्यवस्थाओं के लिए नादान लोग मायावती को दोषारोपित कर रहे हैं| माया काफी हद तक जिम्मेदार  हैं पर पूरी तरह से नहीं|प्रदेश की हालत सुधारने के लिए उनके पास पर्याप्त अवसर था, पर उसका इस्तेमाल उन्होंने अपनी संकीर्ण राजनीति चमकाने में किया न कि प्रदेश के हालात सुधारने में|माया के लोग इन हालातों के लिए मुलायम,राजनाथ,कल्याण को भी दोषी बताएं तो वह भी सही ही है|
       वास्तव में इन हालातों के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार हम और आप हैं|विकास की राजनीति को हमने आपने ही तवज्जो नहीं दी उसी का प्रतिफल है प्रदेश के ये हालात|जातिवाद की राजनीति में पगे बयान और नेता हमें पसंद आते रहे, हम उन्हें अपना कीमती वोट सौपते रहे,और जातिवाद का दानव मजबूत होता गया|आज उसी दानव ने सारी व्यवस्था को अपनी आगोश में ले लिया है| यदि जातिवाद के इस दानव के जन्मदाता और पालक हम हैं,तो हमें ही इसके वध के लिए भी आगे आना होगा| यही हम यूपी वासियों का वास्तविक प्रायश्चित होगा|बिहार के लोगों ने यह प्रायश्चित किया है,क्या हम और आप करने को तैयार हैं?
     

Saturday, March 19, 2011

HOLI K DIN......

लोग कहते हैं कि....
होली के दिन दिल मिल जाते हैं, 
दुश्मन भी गले लग जाते हैं |
यह चेतावनी कोई क्यों नहीं जारी करता कि ...
यदि लापरवाही से होली खेली,  
दूसरों  की देखा-देखी  पानी की तेज़ धार झेली ...
तो बुड्ढ़े बीमार पड़ जाते हैं |

कहाँ दुश्मन गले मिले ?
ये तो फिल्म लोक की मुलायम-माया है , 
जो आज तक दर्शाती आ रही है कि... 
 दुश्मन भी गले मिल  जाते हैं | 
पर यू पी के मुलायम तो
दुश्मनों के प्रति बगावती हो गए हैं |
सब सत्ता की माया का प्रभाव है ,
कि माया भी माया छोड़ने को तैयार नहीं |
सत्ता ही जब राजनीती की अपरिहार्यता बन जाय तो, 
 नीति विचार भी सड़ जाते हैं |

और आप कह रहे थे कि दुश्मन भी गले लग जाते हैं |
यदि ऐसा है तो इस्रायल और फलस्तीन मिल जाएँ गले |
भारत पाक .... ओबामा - ओसामा ....
कब आयेगी इनके गले मिलने वाली होली ...
आखिर कब   ?

Thursday, March 17, 2011

Ye Kaise Hole Hai..?

घर कैसे पहुंचू .....?
रेलवे बेहाल है,
ट्रैक पर लेटे हैं जाट,
बड़ा बुरा हाल है|
सरकार का भी ....
अस्तित्व है,
ये बात अब लगती ठिठोली है,
मेरा मन पूंछ रहा है .... 
आखिर ये कैसे होली है ...?
बोर्ड का इम्तिहान,
सपाइयों का आंदोलित हुडदंग,
माया और मुलायम की..
सत्ता प्रेरित जंग..
सड़कों के किनारों से,
अबीर गुलाल गायब ....
भगदड़,आपाधापी,लाठी और गोली है |
मेरा मन पूंछ रहा है,
आखिर ये कैसी होली है?
विकीलीक्स के भारतीय रहस्योद्घाटन,
जापान के आंसू ...
भाजपा की  बेबशी,
अपनी लहराती जीडीपी... और
नए वित्तीय वर्ष के संभावित आंकड़ें धांसू ....
पर आम आदमी की महंगाई से,
खाली हो गयी झोली है|
 मेरा मन पूंछ रहा है,
आखिर ये कैसी होली है?