Monday, March 21, 2011

Bachao..Bachao UP Ko Bachao.....

 (सुशील अवस्थी "राजन")     हाँ मैंने यू.पी. याने उत्तर प्रदेश को बचाने की गुहार लगाई है ..... कि बचाओ ...बचाओ ....| हमारा प्रदेश हमारी कमजोरियों के कारण लुट रहा है| विकास नापने तोलने के जितने पैमाने होते हैं, हम हर पैमाने पर फिसड्डी ही hain | आंकड़े हम नहीं चस्पा कर पाएंगे ,क्योंकि आंकड़ो से विचारों की लयबद्धता कुंद हो जाती है,पर सत्य है कि मंदिर- मस्जिद, हिन्दू -मुस्लिम, जाति -पांति, की संकीर्णता ने हमारा बेड़ा गर्क किया है | इक्कीसवीं शताब्दी में.. जब  सारी दुनिया में भारत का डंका बज रहा है, ओबामा जैसा ....ताकतवर मुल्क अमेरिका का राष्ट्रपति अपने देश के लोगों को रोजगार देने के लिए भारत की यात्रा करता है,उसी मुल्क के एक प्रमुख प्रान्त उत्तर प्रदेश में शाम होते ही गाँव,क़स्बे और शहर सब अंधकार की चपेट में होते हैं|बिजली के खम्भे होते हैं... उनपर झूलते तार भी होते हैं ...पर बिजली नहीं | तमसो मा ज्योतिर्गमय ...मतलब अंधकार से प्रकास  की ओर ले चलने की हमारी झूठी कामना आज तक पूरी न हो सकी | 
       मै अपनी और किसी लाचारी या बेचारगी का जिक्र नहीं करना चाहूँगा, कि स्कूल,अस्पताल,कल कारखानें,सड़कें,नहरें,पेयजल आपूर्ति,कानून व्यवस्था सब अपनी बदहाली  पर आंसू बहा रहे हैं| प्रकाश  व्यवस्था का जिक्र करना इसलिए भी मै जरुरी समझता हूँ, क्योंकि अंधकार यानी अज्ञानता से लड़ने में प्रकाश ज्ञान का प्रतीक है|
       इन अव्यवस्थाओं के लिए नादान लोग मायावती को दोषारोपित कर रहे हैं| माया काफी हद तक जिम्मेदार  हैं पर पूरी तरह से नहीं|प्रदेश की हालत सुधारने के लिए उनके पास पर्याप्त अवसर था, पर उसका इस्तेमाल उन्होंने अपनी संकीर्ण राजनीति चमकाने में किया न कि प्रदेश के हालात सुधारने में|माया के लोग इन हालातों के लिए मुलायम,राजनाथ,कल्याण को भी दोषी बताएं तो वह भी सही ही है|
       वास्तव में इन हालातों के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार हम और आप हैं|विकास की राजनीति को हमने आपने ही तवज्जो नहीं दी उसी का प्रतिफल है प्रदेश के ये हालात|जातिवाद की राजनीति में पगे बयान और नेता हमें पसंद आते रहे, हम उन्हें अपना कीमती वोट सौपते रहे,और जातिवाद का दानव मजबूत होता गया|आज उसी दानव ने सारी व्यवस्था को अपनी आगोश में ले लिया है| यदि जातिवाद के इस दानव के जन्मदाता और पालक हम हैं,तो हमें ही इसके वध के लिए भी आगे आना होगा| यही हम यूपी वासियों का वास्तविक प्रायश्चित होगा|बिहार के लोगों ने यह प्रायश्चित किया है,क्या हम और आप करने को तैयार हैं?
     

Saturday, March 19, 2011

HOLI K DIN......

लोग कहते हैं कि....
होली के दिन दिल मिल जाते हैं, 
दुश्मन भी गले लग जाते हैं |
यह चेतावनी कोई क्यों नहीं जारी करता कि ...
यदि लापरवाही से होली खेली,  
दूसरों  की देखा-देखी  पानी की तेज़ धार झेली ...
तो बुड्ढ़े बीमार पड़ जाते हैं |

कहाँ दुश्मन गले मिले ?
ये तो फिल्म लोक की मुलायम-माया है , 
जो आज तक दर्शाती आ रही है कि... 
 दुश्मन भी गले मिल  जाते हैं | 
पर यू पी के मुलायम तो
दुश्मनों के प्रति बगावती हो गए हैं |
सब सत्ता की माया का प्रभाव है ,
कि माया भी माया छोड़ने को तैयार नहीं |
सत्ता ही जब राजनीती की अपरिहार्यता बन जाय तो, 
 नीति विचार भी सड़ जाते हैं |

और आप कह रहे थे कि दुश्मन भी गले लग जाते हैं |
यदि ऐसा है तो इस्रायल और फलस्तीन मिल जाएँ गले |
भारत पाक .... ओबामा - ओसामा ....
कब आयेगी इनके गले मिलने वाली होली ...
आखिर कब   ?

Thursday, March 17, 2011

Ye Kaise Hole Hai..?

घर कैसे पहुंचू .....?
रेलवे बेहाल है,
ट्रैक पर लेटे हैं जाट,
बड़ा बुरा हाल है|
सरकार का भी ....
अस्तित्व है,
ये बात अब लगती ठिठोली है,
मेरा मन पूंछ रहा है .... 
आखिर ये कैसे होली है ...?
बोर्ड का इम्तिहान,
सपाइयों का आंदोलित हुडदंग,
माया और मुलायम की..
सत्ता प्रेरित जंग..
सड़कों के किनारों से,
अबीर गुलाल गायब ....
भगदड़,आपाधापी,लाठी और गोली है |
मेरा मन पूंछ रहा है,
आखिर ये कैसी होली है?
विकीलीक्स के भारतीय रहस्योद्घाटन,
जापान के आंसू ...
भाजपा की  बेबशी,
अपनी लहराती जीडीपी... और
नए वित्तीय वर्ष के संभावित आंकड़ें धांसू ....
पर आम आदमी की महंगाई से,
खाली हो गयी झोली है|
 मेरा मन पूंछ रहा है,
आखिर ये कैसी होली है?

Ye Kaise Hole Hai..?

घर कैसे पहुंचू .....?
रेलवे बेहाल है,
ट्रैक पर लेटे हैं जाट,
बड़ा बुरा हाल है|
सरकार का भी ....
अस्तित्व है,
ये बात अब लगती ठिठोली है,
मेरा मन पूंछ रहा है .... 
आखिर ये कैसे होली है ...? 

Monday, March 14, 2011

Kaun Vapas Layega Athah Dhan......

     आज कल बाबा रामदेव धन चर्चा में हैं /वो बात कर रहे हैं विदेशों में जमा किये गए काले धन की /तो कुछ लोग बाबा पर ही उंगली उठा रहे हैं /धन बड़े आकर्षण की चीज़ है /इसीलिए  सारे देश का ध्यान बरबस ही उस धन की तरफ है जिसके बारे में कहा जा रहा है कि यह आम आदमी के साथ छल करके विदेशो को भेजा गया है /
    सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सिर्फ धन वापसी की चर्चा ही होगी या फिर इसे वापस भारत लाने का कोइ जतन भी किया जायेगा /यदि हाँ तो कब और कैसे ?कौन करेगा धन वापसी की पहल ?बाबा रामदेव,आडवानी या फिर कोइ और ?
     बाबा जी ऐसा कुछ कर सकते हैं,इसमे मुझे कुछ नहीं पूरा संदेह है /अथाह धन अर्जित करने वाला व्यक्ति कभी इस तरह का काम नहीं कर सकता /हाँ इस तरह की चर्चाएँ गर्म करके अपना काम जरुर बना लेगा /बाबा जी ने अल्प अवधि में जितना धनार्जन किया है वह सीधे रास्ते से संभव नहीं है /बाबा जी भी काली कमाई के खेल में कहीं न कहीं शामिल अवश्य होंगे|
     आडवानी जी इतना ऊल जुलूल पहले ही कह चुके हैं कि आम आदमी उन पर भरोसा ही नहीं करेगा|कभी जिन्ना महान ....तो कभी कुछ|उन्हें तो सिर्फ प्रधानमंत्री बनने कि जल्दी है,यह सारा देश जान चुका है |
    

Thursday, March 10, 2011

Shakti Aur Jimmedari....

भारत विकास की सही राह पर है/ दुनिया आंकलन कर रही है कि आने वाले वर्षों में हम आर्थिक विकास की दौड़ में चीन को पछाड़ सकते हैं/चीन आर्थिक विकास की लम्बी दौड़ लगाने के बाद हांफ सा गया है/बुजुर्ग आबादी के दम पर ड्रेगन आखिर कब तक  युवा टाइगरों से टक्कर लेगा?हम युवा एक नए भारत के निर्माण की पटकथा लिख रहे हैं/अपनी मेहनत और लगन के बल पर हम नित नई ऊचाई छू रहे हैं/हम अपनी पहले की पीढ़ी की अपेक्छा कम सांप्रदायिक व जातिवादी हैं/भ्रष्टता व अन्याय के हम अपने पूर्वजों की तुलना में ज्यादा खिलाफ हैं/यहाँ हम आजादी के बाद के अपने पूर्वजों से अपनी तूलना कर रहे हैं न कि आदि अनादिकाल के पूर्वजों से/बहुत से मुद्दों पर यदि हमने अपने पुरखों से दुनिया को समझने की सीख पाई है तो अनेंक मुद्दों पर हमने अपनें माँ-बाप को एक नया नजरिया भी दिया है/ लेकिन आज सब युवा भारत याने कि यंगिस्तान की तरफ आशा भरी निगाहों से देख रहे हैं इसलिए हम युवाओं की जिम्मेदारियां भी बढ़ गयीं हैं/हमें राजनीति के छेत्र में भी आगे आना होगा/परिवर्तन व सुधारों का सबसे बड़ा कार्य राजनीति के ही माध्यम से संभव है,इसलिए राजनीति से विरक्ति के भाव से हमें बचना होगा/ जिस प्रकार डाक्टर व इंजीनियर बनना हमारे एजेंडे में होता है  vaise ही rajneta बनना भी हमारे एजेंडे में hona chahiye / bakee fir kabhee .....

Tuesday, March 8, 2011

Kala Dhan...........

धन जीविकोपार्जन के लिए जरुरी है /पर कितना ..........? कुछ संतोषी संतों ने कहा कि सांई इतना दीजिये जा में कुटुम समाय .......पर आजकल तो धन की चाह रखने वालों का दिल मांगे मोर .....वाले फार्मूले को स्वीकारता जा रहा है /देश का अरबों रुपया विदेशी बैंकों में जमा है /हसन नाम का एक व्यक्ति तो खरबों रुपया का अकेला मालिक है /हम भी तो धनिकों को अतिरिक्त सम्मान देतें हैं /बगैर यह जाने कि जिस धन का वह मालिक है, वह कैसे कमाया गया है?धनिकों का सम्मान तो होना चाहिए पर उचित तरीके से अमीर बने लोगों का /ऐसा कर के हम शायद काले धन की कुछ मुखालफत कर सकेंगे / ........सुशील अवस्थी "राजन"